केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर साधा निशाना, कहा राजा को राज छिन जाने की ज्यादा चिंता 

जयपुर/जोधपुर 22 जून। राजस्थान की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली 11 वर्ष की मासूम का बलात्कार कर उसका चेहरा पत्थर से इसलिए कुचल दिया गया, ताकि उसकी पहचान न हो सके। राजस्थान में ऐसी दिल दहलाने वाली घटनाओं को आम जन-जीवन का हिस्सा बनाने के लिए गहलोत जी का धन्यवाद तो नहीं कर सकते, लेकिन सवाल पूछकर उन्हें उनकी नकली नींद से तो उठा ही सकते हैं।

अपने बयान में शेखावत ने कहा कि राजा को अपना राज छिन जाने की चिंता है, अपनी चिंता में राजा अपनी आंखों और कानों को सिर्फ दूसरों की जासूसी में लगाए बैठा है। अपनी अव्यवस्थित राजनीति से त्रस्त जनता की तरफ देखने के लिए न तो गहलोत साहब की आंखें उपलब्ध हैं और न ही उनकी दुविधा सुनने के लिए कान। कुर्सी इनके पास संभल कर रहेगी तो दिक्कत और अगर प्रतिद्वंद्वी के पास जाएगी तो दिक्कत, दोनों ही हाल में भुगतेगी राज्य की जनता ही।

उन्होंने कहा कि गहलोत जी ये सब अपराध आप ही के सिर पर मढ़े जाएंगे। इन मासूमों का, गरीबों का ध्यान क्यों नहीं आता आपको? क्या इन्हें अपने राज्य का हिस्सा नहीं मानते? इनका अपराध सिर्फ इतना है कि ये आपको मुखिया मान बैठे और अपनी सुरक्षा आपके हाथ में दे बैठे।

चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना की खुल गई पोल
राज्य सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि गहलोत जी ने देशभर में विज्ञापन देकर जिस मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना का ढोल पीटा था, उसकी पोल एक रिपोर्ट खोल रही है। रिपोर्ट से पता चलता है कि राजस्थान में आपके पास कैश है, तभी इलाज होगा। गरीबों के लिए राजस्थान के अस्पतालों में जगह नहीं है। राज्य सरकार की सर्वाधिक प्रचारित योजना की अस्पताल प्रबंधनों को परवाह नहीं है। कोरोना के दौरान भी इलाज नहीं मिला या फिर परिजनों पर कर्ज चढ़ा दिया गया। अब ब्लैक फंगस के मरीजों को भी भर्ती नहीं किया जा रहा। राज्य सरकार ने इस योजना की मॉनिटरिंग नहीं की।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योजना में लिस्टेड अस्पताल इसके तहत इलाज करने से साफ इनकार कर रहे हैं, मतलब राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य बीमा के नाम पर गरीबों से मजाक हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी से मेरा विनम्र आग्रह है कि वे इस रिपोर्ट को गंभीरता से लें, क्योंकि योजना से राज्य के मुखिया का पदनाम जुड़ा हुआ है। इलाज से मना करने वाले अस्पतालों की जांच की जाए और गलती मिलने पर कड़ी कार्रवाई हो। जिन गरीबों से लाखों के बिल वसूले गए हैं, उनकी रकम वापस की जाए। बिल का भुगतान सरकार करे।